मैं एक कवि हूं, मुझे कवि ही रहने दो

बिलासपुर। जिला भाषा विभाग के तत्वावधान में मासिक साहित्यिक संगोष्ठी का आयोजन सेवानिवृत्त सूचना एवं जन संपर्क अधिकारी आनंद सोहड़ की अध्यक्षता में किया गया। इस दौरान साहित्यकार रतनचंद निर्झर ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। जिला भाषा अधिकारी अनीता शर्मा ने संगोष्ठी का संचालन किया।
जिला भाषा अधिकारी अनीता शर्मा ने सर्वप्रथम रत्ना वर्मा को पाठ के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने मैं एक कवि हूं, मुझे कवि ही रहने दो कविता सुनाई। अनिल मराठी ने नमक नमकीन नहीं रहा, चीनी मिठठी नहीं रही, अब हवाओं में वह पहले सी खुशबू नहीं रही। संदेश शर्मा ने कांटों की सेज लगे, पलना जिया घबराए यहां, मैं खुद को छिपाऊं कहां, प्रदीप गुप्ता ने राजनेताओं पर कटाक्ष करते हुए कहा देश हो गया आपके अब्बा की जागीर, जैसा चाहे भोगिए, जनता हो चाहे फकीर, संजीव शर्मा ने अध्यापक के पढ़ाने के तरीके पर कटाक्ष करते हुए कहा कि अध्यापक बोला मुंह क्यों खोला, चुप हो जा चुप चुप चुप, बच्चा बोला ऐसा कैसा होगा। कुलदीप चंदेल ने नाम से नहीं, आदमी तो काम से बड़ा होता है। अनीता शर्मा ने गांव का शर्मिला चांद मुझे छिपा गया बादलों की ओट में, आनंद सोहड़ ने एक टुकड़ा छांव गर मिल जाएगा, जिंदगी का सफर जाएगा। अंत में रतन चंद निर्झर ने पौधे जो तुमने लगाए हैं। पेड़ आज तलक न बन पाए हैँ। जिला भाषा अधिकारी अनीता शर्मा ने कहा कि जून के तीसरे रविवार को बिलासपुर के साहित्यकारों का एक दल मंडी की हिमाचल दर्शन आर्ट गैलरी की सांस्कृतिक यात्रा पर जाएगा।

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